वह घर भी क्या घर है
जिसमें बेटी नहीं होती ।
उसकी मुस्काने-लीलाएं नहीं होती ।
वह घर भी क्या घर है
जिसमें बेटी नहीं होती ।
एक खुशबू है वह ,
कोना-कोना घर का महकाती है वह ,
हंसती-मुस्काती-किलकाती है वह ,
घर को जीवंत बनाती है वह ,
रूठती-एंठती-ज़िदियाती है वह ,
कठोरतम दिलों को
पिघलाती है वह ।
गुलाब की कोमलता है वह ,
उषा की लालिमा है वह ,
माता-पिता की प्राण है वह ,
कुटुंब की आन-बान-शान है वह ,
रत्नों की खान है वह ,
कोयल की तान है वह ,
कवि-कल्पना का गान है वह ,
कुलों के मध्य
एक सुंदर सेतु है वह ,
प्रकृति में नित नए
सृजन की,
हेतु है वह,
शक्ति है वह ,
भक्ति है वह ,
मर्यादाओं की पुंज है वह
नीरवता में मधुर गूंज है वह ,
शीतल समीर है वह,
होली का अबीर है वह,
ताज़गी का स्फुरण है वह,
शांत सौम्य संगीत है वह,
जीवन की आस है वह,
जीने का विश्वास है वह,
शक्ति ऊर्जा अंबिका है वह,
त्र्यंबिका है वह,
त्र्यंबिका है वह|

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